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विराट पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो वज्रनिकाशेन फल्गुनः प्रहसन्निव |  २३   क
त्रय़ोदशेनेन्द्रसमः कृपं वक्षस्यताडय़त् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति