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द्रोण पर्व
अध्याय ५२
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सञ्जय़ उवाच
श्रुत्वा तु तं महाशव्दं पाण्डूनां पुत्रगृद्धिनाम् |  १   क
चारैः प्रवेदिते तत्र समुत्थाय़ जय़द्रथः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति