आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७६

वैशम्पाय़न उवाच

मेघजालनिभं सैन्यं विदार्य स रविप्रभः |  ३२   क
विवभौ कौरवश्रेष्ठः शरदीव दिवाकरः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति