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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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अर्जुन उवाच
तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय़ काय़ं; प्रसादय़े त्वामहमीशमीड्यम् |  ४४   क
पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः; प्रिय़ः प्रिय़ाय़ार्हसि देव सोढुम् ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति