आदि पर्व  अध्याय ५३

सूत उवाच

इदमत्यद्भुतं चान्यदास्तीकस्यानुशुश्रुमः |  १   क
तथा वरैश्छन्द्यमाने राज्ञा पारिक्षितेन ह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति