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शान्ति पर्व
अध्याय ५३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो यय़ुर्यत्र भीष्मः शरतल्पगतः प्रभुः |  २४   क
आस्ते व्रह्मर्षिभिः सार्धं व्रह्मा देवगणैर्यथा ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति