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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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जनमेजय़ उवाच
पूर्वमेव यदा रामस्तस्मिन्युद्ध उपस्थिते |  १   क
आमन्त्र्य केशवं यातो वृष्णिभिः सहितः प्रभुः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति