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अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
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भीष्म उवाच
अथ तौ भगवान्प्राह प्रहृष्टश्च्यवनस्तदा |  ५४   क
न वृथा व्याहृतं पूर्वं यन्मय़ा तद्भविष्यति ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति