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अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
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भीष्म उवाच
ततः प्रविश्य नगरं कृत्वा सर्वाह्णिकक्रिय़ाः |  ६७   क
भुक्त्वा सभार्यो रजनीमुवास स महीपतिः ||  ६७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति