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वन पर्व
अध्याय ११०
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लोमश उवाच
मृग्यां जातः स तेजस्वी काश्यपस्य सुतः प्रभुः |  ४   क
विषय़े लोमपादस्य यश्चकाराद्भुतं महत् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति