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वन पर्व
अध्याय ५३
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नल उवाच
प्रविशन्तं च मां तत्र न कश्चिद्दृष्टवान्नरः |  १६   क
ऋते तां पार्थिवसुतां भवतामेव तेजसा ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति