वन पर्व  अध्याय ५३

नल उवाच

अव्रवीच्चैव मां वाला आय़ान्तु सहिताः सुराः |  १९   क
त्वय़ा सह नरश्रेष्ठ मम यत्र स्वय़ंवरः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति