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शल्य पर्व
अध्याय २८
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युय़ुत्सुरु उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं विदुरः सर्वधर्मवित् |  ९२   क
युय़ुत्सुं समनुज्ञाप्य प्रविवेश नृपक्षय़म् |  ९२   ख
युय़ुत्सुरपि तां रात्रिं स्वगृहे न्यवसत्तदा ||  ९२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति