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विराट पर्व
अध्याय ५३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः शतसहस्राणि शराणां नतपर्वणाम् |  ६२   क
युगपत्प्रापतंस्तत्र द्रोणस्य रथमन्तिकात् ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति