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उद्योग पर्व
अध्याय ५३
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सञ्जय़ उवाच
अनर्हानेव तु वधे धर्मय़ुक्तान्विकर्मणा |  १८   क
सर्वोपाय़ैर्निय़न्तव्यः सानुगः पापपूरुषः |  १८   ख
तव पुत्रो महाराज नात्र शोचितुमर्हसि ||  १८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति