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भीष्म पर्व
अध्याय ५३
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सञ्जय़ उवाच
गजारोहवरैश्चापि तत्र तत्र पदातय़ः |  १६   क
पातिताः समदृश्यन्त तैश्चापि गजय़ोधिनः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति