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द्रोण पर्व
अध्याय ५३
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अर्जुन उवाच
ग्राम्यारण्यानि भूतानि स्थावराणि चराणि च |  ३६   क
त्रातारः सिन्धुराजस्य भवन्ति मधुसूदन ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति