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द्रोण पर्व
अध्याय ५३
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अर्जुन उवाच
यश्च गोप्ता महेष्वासस्तस्य पापस्य दुर्मतेः |  ३८   क
तमेव प्रथमं द्रोणमभिय़ास्यामि केशव ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति