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सभा पर्व
अध्याय ६८
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य राजा सिंहगतेः सखेलं; दुर्योधनो भीमसेनस्य हर्षात् |  २३   क
गतिं स्वगत्यानुचकार मन्दो; निर्गच्छतां पाण्डवानां सभाय़ाः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति