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कर्ण पर्व
अध्याय ५३
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सञ्जय़ उवाच
रथर्षभः कृतवर्माणमार्च्छ; न्माद्रीपुत्रो नकुलश्चित्रय़ोधी |  ८   क
पाञ्चालानामधिपो याज्ञसेनिः; सेनापतिं कर्णमार्च्छत्ससैन्यम् ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति