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शल्य पर्व
अध्याय ५३
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नारद उवाच
प्रिय़ान्प्राणान्परित्यज्य प्रिय़ार्थं कौरवस्य वै |  २५   क
राजानो राजपुत्राश्च समरेष्वनिवर्तिनः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति