आदि पर्व  अध्याय ५४

सूत उवाच

पितामहानां सर्वेषां दैवेनाविष्टचेतसाम् |  २०   क
कार्त्स्न्येनैतत्समाचक्ष्व भगवन्कुशलो ह्यसि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति