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आदि पर्व
अध्याय ५४
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सूत उवाच
तत्र राजानमासीनं ददर्श जनमेजय़म् |  ८   क
वृतं सदस्यैर्वहुभिर्देवैरिव पुरन्दरम् ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति