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शान्ति पर्व
अध्याय ५४
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भीष्म उवाच
चतुर्ष्वाश्रमधर्मेषु योऽर्थः स च हृदि स्थितः |  २१   क
राजधर्मांश्च सकलानवगच्छामि केशव ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति