अनुशासन पर्व  अध्याय ५४

भीष्म उवाच

गीतध्वनिं सुमधुरं तथैवाध्ययनध्वनिम् |  १४   क
हंसान्सुमधुरांश्चापि तत्र शुश्राव पार्थिवः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति