अनुशासन पर्व  अध्याय ५४

भीष्म उवाच

ततोऽन्यस्मिन्वनोद्देशे पुनरेव ददर्श तम् |  २०   क
कौश्यां वृस्यां समासीनं जपमानं महाव्रतम् |  २०   ख
एवं योगवलाद्विप्रो मोहय़ामास पार्थिवम् ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति