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अनुशासन पर्व
अध्याय ५४
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भीष्म उवाच
व्राह्मण्यं दुर्लभं लोके राज्यं हि सुलभं नरैः |  २९   क
व्राह्मण्यस्य प्रभावाद्धि रथे युक्तौ स्वधुर्यवत् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति