menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
chevron_left
chevron_right
उत्तङ्क उवाच
अभिजानामि जगतः कर्तारं त्वां जनार्दन |  १   क
नूनं भवत्प्रसादोऽय़मिति मे नास्ति संशय़ः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति