आदि पर्व  अध्याय १९

सूत उवाच

ततो रजन्यां व्युष्टाय़ां प्रभात उदिते रवौ |  १   क
कद्रूश्च विनता चैव भगिन्यौ ते तपोधन ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति