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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कदाचिद्भगवानुत्तङ्कस्तोय़काङ्क्षय़ा |  १४   क
तृषितः परिचक्राम मरौ सस्मार चाच्युतम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति