विराट पर्व  अध्याय ८

सुदेष्णो उवाच

यं हि त्वमनवद्याङ्गि नरमाय़तलोचने |  २४   क
प्रसक्तमभिवीक्षेथाः स कामवशगो भवेत् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति