वन पर्व  अध्याय ५४

वृहदश्व उवाच

अतीव मुदितो राजा भ्राजमानोंऽशुमानिव |  ३५   क
अरञ्जय़त्प्रजा वीरो धर्मेण परिपालय़न् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति