वन पर्व  अध्याय ५४

वृहदश्व उवाच

ईजे चाप्यश्वमेधेन यय़ातिरिव नाहुषः |  ३६   क
अन्यैश्च क्रतुभिर्धीमान्वहुभिश्चाप्तदक्षिणैः ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति