उद्योग पर्व  अध्याय ५४

दुर्योधन उवाच

पुरा परेषां पृथिवी कृत्स्नासीद्वशवर्तिनी |  २३   क
अस्मान्पुनरमी नाद्य समर्था जेतुमाहवे |  २३   ख
छिन्नपक्षाः परे ह्यद्य वीर्यहीनाश्च पाण्डवाः ||  २३   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति