अनुशासन पर्व  अध्याय ९०

भीष्म उवाच

अथर्वशिरसोऽध्येता व्रह्मचारी यतव्रतः |  २२   क
सत्यवादी धर्मशीलः स्वकर्मनिरतश्च यः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति