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उद्योग पर्व
अध्याय ५४
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दुर्योधन उवाच
गुणहीनं परेषां च वहु पश्यामि भारत |  ६४   क
गुणोदय़ं वहुगुणमात्मनश्च विशां पते ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति