उद्योग पर्व  अध्याय ५४

दुर्योधन उवाच

श्रुत्वा चैतन्मय़ोक्तास्तु भीष्मद्रोणकृपास्तदा |  ७   क
ज्ञातिक्षय़भय़ाद्राजन्भीतेन भरतर्षभ ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति