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भीष्म पर्व
अध्याय ५४
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सञ्जय़ उवाच
अथैनं रथवृन्देन कोष्टकीकृत्य भारत |  २   क
शरैः सुवहुसाहस्रैः समन्तादभ्यवारय़न् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति