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सभा पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
एष माय़ाप्रतिच्छन्नः करूषार्थे तपस्विनीम् |  ११   क
जहार भद्रां वैशालीं मातुलस्य नृशंसकृत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति