भीष्म पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

यथावच्च तमभ्यर्च्य व्रह्मा व्रह्मविदां वरः |  ४१   क
जगाद जगतः स्रष्टा परं परमधर्मवित् ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति