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आदि पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
विदुरस्यैव वचनात्खनित्री विहिता ततः |  १८   क
मोक्षय़ामास योगेन ते मुक्ताः प्राद्रवन्भय़ात् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति