आदि पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

लव्धवांस्तत्र वीभत्सुर्भार्यां राजीवलोचनाम् |  ३३   क
अनुजां वासुदेवस्य सुभद्रां भद्रभाषिणीम् ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति