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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णं समासाद्य कुन्ती राजसुता तदा |  १४   क
प्रोवाच राजशार्दूल वाष्पगद्गदय़ा गिरा ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति