आदि पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

मोक्षय़ामास वीभत्सुर्मय़ं तत्र महासुरम् |  ३८   क
स चकार सभां दिव्यां सर्वरत्नसमाचिताम् ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति