आदि पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

तांस्तथा रूपवीर्यौजःसम्पन्नान्पौरसंमतान् |  ७   क
नामृष्यन्कुरवो दृष्ट्वा पाण्डवाञ्श्रीय़शोभृतः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति