शान्ति पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

यो न कामान्न संरम्भान्न भय़ान्नार्थकारणात् |  ७   क
कुर्यादधर्मं धर्मात्मा स मां पृच्छतु पाण्डवः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति