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अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
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च्यवन उवाच
व्रह्मक्षत्रविरोधेन भविता कुलसङ्करः |  ११   क
पौत्रस्ते भविता राजंस्तेजोवीर्यसमन्वितः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति