सभा पर्व  अध्याय ४९

दुर्योधन उवाच

अभिजग्मुर्महात्मानं मन्त्रवद्भूरिदक्षिणम् |  १२   क
महेन्द्रमिव देवेन्द्रं दिवि सप्तर्षय़ो यथा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति