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शान्ति पर्व
अध्याय २८७
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पराशर उवाच
यथा तिलानामिह पुष्पसंश्रय़ा; त्पृथक्पृथग्याति गुणोऽतिसौम्यताम् |  १३   क
तथा नराणां भुवि भावितात्मनां; यथाश्रय़ं सत्त्वगुणः प्रवर्तते ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति