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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
सर्वेषामृषिपुत्राणामेष चासीन्मनोरथः |  ३   क
औत्तङ्कीं गुरुवृत्तिं वै प्राप्नुय़ामिति भारत ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति